पाण्डुलिपि-विज्ञान की शाखाएँ एवं उपादेयता
पाण्डुलिपि-विज्ञान की शाखाएँ एवं उपादेयताप्राचीन ग्रंथों के संरक्षण की समस्या (राजशेखर की काव्यमीमांसा के अनुसार)राजशेखर ने अपनी कृति ‘काव्यमीमांसा’ में हस्तलिखित ग्रंथों के पाठ-संक्रमण की असुरक्षा और भविष्य की आशंकाओं को व्यक्त किया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि –सिद्धं च प्रबन्धम् अनेकादर्शगतं कुर्यात् ।अर्थात्, जब कोई ग्रंथ या प्रबंध सिद्ध (तैयार) हो जाए, तो…


