हस्तलिखितशास्त्र (पाण्डुलिपियां) | Manuscriptology (Manuscripts)

हस्तलिखितशास्त्र (पाण्डुलिपियां) | Manuscriptology (Manuscripts)

भारत में प्राचीन काल में ज्ञान प्राप्त करने की परम्परा श्रुति परम्परा हुआ करती थी । इसी कारण से विश्व की प्राचीनतम ज्ञानराशी वेदों को भी श्रुति कहा गया है । प्राचीन काल में मन्त्रों का श्रवण करके यथावत् स्मरण किया जाता था अतः उस परम्परा को श्रुति शब्द से सम्बोधित किया गया । बढते…

पाण्डुलिपि सम्पादन | Manuscript Editing

पाण्डुलिपि सम्पादन | Manuscript Editing

प्राचीन हस्तलिखित ग्रन्थों का सीधे प्रकाशन करना सम्भव नहीं है । प्रकाशन से पूर्व उसका सम्पादन किया जाता है । सम्पादन कर्ता ग्रन्थ का अक्षरशः पुनर्लेखन करता है । जिससे पाण्डुलिपि की उस प्रतिलिपि में जो भी दोष होते है उनका भी निवारण कर दिया जाता है ।पाण्डुलिपि सम्पादक को कुछ बातों का ध्यान रखना…

संशोधन के प्रकार तथा वर्गीकरण

संशोधन के प्रकार तथा वर्गीकरण

शोध के प्रकार –अनुसंधान के क्षेत्र में संशोधन के अनेकों प्रकार हो सकते हैं। तथापि अनुसंधाताओं ने संशोधन के कुछ प्रकार निर्धारित किया है । अनुसंधान के प्रकार शोध के अलग-अलग क्षेत्र से संबंधित है जिनमें विज्ञान, समाज, तकनीकी, साहित्य, भाषा आदि क्षेत्र सम्मिलित हैं । शोध में संशोधन के प्रकारों को निम्न प्रकार से…

संशोधन का अर्थ एवं स्वरूप

संशोधन का अर्थ एवं स्वरूप

संशोधन शब्द का अर्थ पुनः पुनः खोज या अन्वेषण करने से है। वर्तमान समय विज्ञान अथवा तकनीकी युग के नाम से जाना जा रहा है। आज के इस तकनीकी युग में अथवा वैज्ञानिक युग में संशोधन का विशेष महत्व है। अभी तक अनेक प्रकारों से अनेकों विद्वानों ने संशोधन की विविध व्याख्याएं की है तथा…

Personality development through Sanskrit

संस्कृत के द्वारा व्यक्तित्व निर्माण Personality development through Sanskrit

संस्कृत के द्वारा व्यक्तित्व निर्माणयह हम सभी को विदित है कि भारत देश एक समय पर विश्व गुरु पद पर सुशोभित था । तदन्तर आज तक यह सौभाग्य किसी अन्य देश को प्राप्त नहीं हुआ है । विचारणीय विषय यह है कि ऐसे कौनसे कारण रहे कि भारत के उपरान्त अन्य देश इस पद को…

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत साहित्य के आदिकवि माने जाते है
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महर्षि वाल्मीकि संस्कृत साहित्य के आदिकवि माने जाते है

वन्दे वाल्मीकिकोकिलम् महर्षि वाल्मीकि संस्कृत साहित्य के आदिकवि माने जाते है । इनका महाकाव्य हिन्दू संस्कृति और समाज का आधार स्तम्भ है । भारतीय परम्पराओं में वाल्मीकि विरचित रामायण को देवत्व का स्थान प्राप्त है । समय – समय पर इसका पारायण तथा पूजन किया जाता है । वाल्मीकि रामायण सनातन संस्कृति का प्रतीक है…

Sanskrit language and literature संस्कृतभाषा व साहित्य
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Sanskrit language and literature संस्कृतभाषा व साहित्य

संस्कृतभाषा प्राचीन काल से ही भारतीय शास्त्रपरम्परा की वाहिनी रही है । प्राचीन भारतीय ग्रन्थ संस्कृत के आश्रय से ही समृद्ध हुए हैं । भारतीय वेद. वेदांग, दर्शन, कला आदि समस्त साहित्यग्रन्थों को संस्कृत ने ही अपने अंक में स्थान दिया है । संस्कृतभाषा समस्त भारतीय भाषाओं में अग्रगण्य तथा जननी स्वरुपा है । अन्तर्राष्ट्रीय…

अष्टविनायक :-  गणपति के आठ अवतार

अष्टविनायक :-  गणपति के आठ अवतार

भारत देश का दस दिवसीय उत्सव – गणेश उत्सव । यह उत्सव भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि से चतुर्दशी तिथि तक मनाया जाता है । इस अवसर पर भगवान् गणेश की पार्थिव प्रतिमा की प्रणा प्रतिष्ठा करके घर- घर में पूजा की जाती है । भारतीय शास्त्र परम्परा के अनुसार माँ पार्वती के द्वारा चतुर्थी…

Hartalika Vrat a Scientific and Social Analysis of Indian Fasts and Traditions
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हरतालिका व्रत: भारतीय व्रत और परंपराओं का वैज्ञानिक व सामाजिक विश्लेषण

Hartalika Vrat Scientific and Social Analysis of Indian Fasts and Traditions भारतदेश अपनी संस्कृति और अपनी परम्पराओं के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है । कुछ लोग इन परम्पराओं को रुढी मानकर निभाते चले आ रहे है । किन्तु वस्तुतः इनके पीछे छिपे गूढ अर्थों को हम नहीं समझ पाते है । भारत की संस्कृत और…

Sanskrit slogan with Hindi meaning

20 संस्कृत सूक्तियाँ हिन्दी अर्थ सहित Sanskrit slogan with Hindi meaning

Sanskrit slogan with Hindi meaning असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्माऽमृतं गमय । – बृह. 1/3/28मुझे असत् से सत् की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमृत की ओर ले चलो । पुमान् पुमांसं परिपातु विश्वतः । ऋग्. 6/75/14प्रत्येक मनुष्य परस्पर मनुष्य की सभी प्रकार से रक्षा करें । घृतात् स्वादीयो मधुनश्च…