Six types of teachers in human life

Six types of teachers in human life षडेते गुरवः स्मृताः

मनुष्य जीवन में शिक्षा का बहुत अधिक महत्व है । अतः शिक्षा देने वाले शिक्षक का महत्व भी कम नहीं है । मानव जीवन में शिक्षा मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है । शिक्षा उतनी ही आवश्यक है जितना की भोजन वस्त्रादि । मनुष्य जीवन के प्रत्येक क्षण में शिक्षा ग्रहण करता है । जन्म…

भारत में अनेक उत्सव पशुओं के निमित्त आयोजित किये जाते है । उनमें से एक उत्सव है – बैलपोळा

भारत में अनेक उत्सव पशुओं के निमित्त आयोजित किये जाते है । उनमें से एक उत्सव है – बैलपोळा

बैलपोळाभारत देश विविधताओं का देश है यह वाक्य अनेक पुस्तकों व लेखादि में पढने को मिलता है । भारत देश पर तथा उसकी संस्कृति पर लेखनी चलाने वाला कोई भी व्यक्ति इस वाक्य का प्रयोग किये बिना नहीं रह सकता । इसका कारण है हमारी संस्कृति की विविधता और विविधताओं के द्वारा जन समुदाय को…

Sanskrit Shlokas on Moh with meaning in hindi

Sanskrit Shlokas on Moh with meaning in hindi

यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति।तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ।।भगवद्गीता – 2.52 जब तुम्हारी बुद्धि, आत्मा और अनात्मा के विवेकरुपी ज्ञान को मलिन करने वाली मोहरुपी कालिमा का उल्लङ्घन कर जाएगी अर्थात् जब बुद्धि शुद्ध हो जाएगी तब तुम्हे तुम्हारे लिए सुनने योग्य और तुम्हारे द्वारा सुने हुए विषयों से वैराग्य की प्राप्ति हो जाएगी…

Sanskrit Shlokas with Meaning in Hindi

40 Sanskrit Shlokas with Meanings in Hindi संस्कृत श्लोक अर्थ सहित हिन्दी मे

Sanskrit Shlokas on Dharma सुखार्थं सर्वभूतानां मताः सर्वाः प्रवृत्तयः ।सुखं नास्ति विना धर्मं तस्मात् धर्मपरो भव ॥ अष्टांग. सूत्र. अ. – 2/20संसार के समस्त प्राणियों की प्रवृत्ति सुखार्थ अर्थात् सुख के लिए ही होती है । किन्तु धर्मसंगत आचरण के बिना सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती । अत: सदैव धर्म परायण होकर ही रहना…

Sanskrit Shlokas on greed with Hindi Meaning लोभ के ऊपर संस्कृत के श्लोक

Sanskrit Shlokas on greed with Hindi Meaning लोभ के ऊपर संस्कृत के श्लोक

Sanskrit Shlokas on Greed लोभात्क्रोधः प्रभवति लोभात्कामः प्रजायते ।लोभान्मोहश्च नाशश्च लोभः पापस्य कारणम् ।।(हितोपदेश, मित्रलाभ, २७) लोभ नामक भाव से क्रोध का प्रादुर्भाव होता है । क्योकि जिस वस्तु को लोभ होगा उसको प्राप्त करने के प्रयत्न भी अनेक होंगे क्योकि वही लोभ कामना के उदय का कारण बनता है फिर भी अगर वह वस्तु…

Sanskrit Shlokas on Anger

Sanskrit Shlokas on Anger with Meaning in Hindi

Sanskrit Shlokas on Anger क्रोधो सर्वार्थनाशकोक्रोध मनुष्य के सभी अर्जित कर्मों का नाश कर देता है । वाच्यावाच्यं प्रकुपितो न विजानाति कर्हिचित्।नाकार्यमस्ति क्रुद्धस्य नवाच्यं विद्यते क्वचित्॥ – श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण 5.55.5 मनुष्य जब क्रोध में होता है तो उसको क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं बोलना चाहिए इसका विवेक नहीं रहता । क्रुद्ध मनुष्य उस अवस्था…

Personality Development by Sanskrit Shlokas संस्कृत के द्वारा व्यक्तित्व निर्माण

Personality Development by Sanskrit Shlokas संस्कृत के द्वारा व्यक्तित्व निर्माण

यह हम सभी को विदित है कि भारत देश एक समय पर विश्व गुरु पद पर सुशोभित था । तदन्तर आज तक यह सौभाग्य किसी अन्य देश को प्राप्त नहीं हुआ है । विचारणीय विषय यह है कि ऐसे कौनसे कारण रहे कि भारत के उपरान्त अन्य देश इस पद को प्राप्त करने हेतु स्वयं…

Rakshabandhan

रक्षाबंधन की वह कथा जिससे मनुष्यों की प्रेतबाधा तथा दुख दूर होता है

द्वापर काल में धर्मराज युधिष्ठिर को शंका हुई और उनहोने भगवान श्रीकृष्ण को पूछा- ‘हे माधव ! मेरे मन में रक्षाबंधन की कथा जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई है । हे अच्युत ! मुझे वह सत्य कथा सुनाइए जिससे मनुष्य जीवन के कष्ट, प्रेतबाधा तथा दुखों का परिहार होता है।’ भगवान कृष्ण ने अत्यन्त सरल…

Bharatiya Sanskriti

भारतीय संस्कृति एक वैज्ञानिक संस्कृति

भारत देश सनातन संस्कृति वाला देश है । विश्व का एक मात्र ऐसा देश जहाँ हजारों वर्षों से चली आ रही संस्कृति आज भी जीवित है और अब भी फल फूल रही है । इस देश की संस्कृति सनातन कही जाती है सनातन का अर्थ होता है जो पहले भी था आज भी है और…